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ग्रहण योग

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ग्रहण योग

ग्रहण योग कुंडली में तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ युति/ दृष्टि / डालते हैं। यह संयोजन आमतौर पर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के दौरान होता है।

ग्रहण योग का प्रभाव

1. नकारात्मक प्रभाव

ग्रहण योग मानसिक तनाव, भावनात्मक अस्थिरता और मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा कर सकता है। व्यक्ति को भ्रम और चिंता के दौरों का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, विशेषकर आंखों, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

ग्रहण योग जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे करियर, रिश्ते और व्यक्तिगत प्रयासों में बाधाएं, विलंब और अप्रत्याशित चुनौतियां ला सकता है।

व्यक्ति को पिछले जन्म के कर्मिक बोझ से निपटना पड़ सकता है, जिससे वर्तमान जीवन की स्थितियों में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।

2. सकारात्मक प्रभाव

ग्रहण योग से प्रभावित व्यक्ति का रुझान आध्यात्मिक और गूढ़ विज्ञानों की ओर हो सकता है ।

यह योग व्यक्ति को गहन एकाग्रता और दृढ़ संकल्प प्रदान कर सकता है, जिससे वह बाधाओं को पार कर अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है।

व्यक्ति का जीवन के प्रति दृष्टिकोण विस्तृत हो सकता है, जिससे वह चीजों को दूसरों से अलग ढंग से देखता है और नए विचार प्रस्तुत कर सकता है। 

ग्रहण योग के उपाय

  1. नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।
  2. राहु और केतु के विशेष मंत्रों का जाप, जैसे “ॐ राहवे नमः” और “ॐ केतवे नमः”, भी लाभकारी हो सकता है।
  3. राहु और केतु पर ध्यान केंद्रित करके, विशेष मंत्रों का जाप, जैसे “ॐ राहवे नमः” और “ॐ केतवे नमः”, उनकी ऊर्जा को संतुलित कर सकते हैं।
  4. राहु और केतु से संबंधित वस्तुओं का दान, जैसे काले तिल, सरसों का तेल, और नीले या काले कपड़े, शनिवार को करने से अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं।
  5. नियमित ध्यान और योग अभ्यास मानसिक तनाव और भावनात्मक अशांति को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
  6. बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और पितरों संबंधित कर्मकांड करना ग्रहण योग से जुड़े प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकता है।